MAHANAGAR TIMES JAIPUR NEWS - 18 JULY 2012
- आरसीएम के धरने पर मां-बाप के साथ बच्चे भी बैठे
- स्कूल छूटे, हालात बदतर गाइड लाइन पर असमंजस
महानगर संवाददाता
जयपुर, 18 जुलाई। संदीप उम्र 9 साल (पंजाब), पार्थिव उम्र 5 साल (पंजाब), विनय उम्र 6 साल (हरियाणा), राशि उम्र 4 साल (हरियाणा), इंद्रराज मीणा उम्र 7 साल(राजस्थाान)। ये नाम है कुछ ऐसे बच्चों के जो जुलाई के इस महीने में भी अपने स्कूलों की जगह सैकड़ों किलोमीटर दूर जयपुर के उद्योग मैदान में करीब दो महीने से अपने मां-बाप के साथ धरने पर बैठे हैं।
जयपुर, 18 जुलाई। संदीप उम्र 9 साल (पंजाब), पार्थिव उम्र 5 साल (पंजाब), विनय उम्र 6 साल (हरियाणा), राशि उम्र 4 साल (हरियाणा), इंद्रराज मीणा उम्र 7 साल(राजस्थाान)। ये नाम है कुछ ऐसे बच्चों के जो जुलाई के इस महीने में भी अपने स्कूलों की जगह सैकड़ों किलोमीटर दूर जयपुर के उद्योग मैदान में करीब दो महीने से अपने मां-बाप के साथ धरने पर बैठे हैं।
केन्द्र सरकार का शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने के दावे करने वाली राजस्थान सरकार के पैदा किए हालातों ने इन बच्चों को इनके अधिकारों से दूर कर दिया है। चिटफंड कंपनियों के फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के नाम पर बंद की गई भीलवाड़ा की एमएलएम कंपनी आरसीएम से जुड़े परिवारों के ये बच्चे अब अपने मां-बाप के संघर्ष में न चाहते हुए भी शामिल हो रहे हैं क्योंकि पिछले 7 महीने की बेरोजगारी के चलते इनमें से अधिकांश परिवारों के पास तो इतना पैसा भी नहीं बचा कि ये इन्हें तालीम दिलवा सकें।
दो महीने से अधिक का समय हो चुका है आरसीएम के धरने को लेकर लेकिन अभी तक भी सरकार के स्तर पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। एमएलएम कंपनियों की गाइडलाइन तय करने के लिए जो आश्वासन सरकारी अधिकारियों के स्तर पर दिए गए थे, वे भी अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। सबसे अहम बात यह है कि पूरा प्रशासन उद्योग मैदान में डटे इन लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज कर रहा है।
पिछले दिनों जयपुर में हुईं बरसात के दौरान यहां की स्थिति नारकीय हो गई।
दो महीने से अधिक का समय हो चुका है आरसीएम के धरने को लेकर लेकिन अभी तक भी सरकार के स्तर पर कोई निर्णय नहीं हो पाया है। एमएलएम कंपनियों की गाइडलाइन तय करने के लिए जो आश्वासन सरकारी अधिकारियों के स्तर पर दिए गए थे, वे भी अभी तक पूरे नहीं हो पाए हैं। सबसे अहम बात यह है कि पूरा प्रशासन उद्योग मैदान में डटे इन लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज कर रहा है।
पिछले दिनों जयपुर में हुईं बरसात के दौरान यहां की स्थिति नारकीय हो गई।
मैदान में पानी भर गया। रात भर महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर धरने पर बैठी रहीं लेकिन प्रशासनिक अधिकारी इससे पूरी तरह अनजान बने रहे। इतना ही नहीं किसी भी अधिकारी ने मौके के हालातों का जायजा लेना तक उचित नहीं समझा और न ही यह जानने का प्रयास किया कि ऐसे बुरे हालातों में यदि कोई दुर्घटना घटित हो गई तो क्या प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
एक ओर तो सरकार जुलाई के दौरान सरकारी स्कूलों में प्रवेशोत्सव मना रही है और निजी स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को प्रवेश देने का दबाव बना रही है।
एक ओर तो सरकार जुलाई के दौरान सरकारी स्कूलों में प्रवेशोत्सव मना रही है और निजी स्कूलों पर शिक्षा का अधिकार के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को प्रवेश देने का दबाव बना रही है।
वहीं दूसरी ओर यहां उद्योग मैदान में अपने मां-बाप के साथ मौजूद दर्जनों बच्चे शिक्षा से महरूम हो रहे हैं। कई लोग तो ऐेसे हैं जिन्हें उनके परिवारों ने अलग कर दिया है क्योंकि कमाई बंद हो चुकी है और कई ऐसे लोग भी हैं जो 7 महीनों की बेराजगारी बदहाली में पहुंच कर बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की भी स्थिति में नहीं हैं।
तारीख पर तारीख
आरसीएम की तालाबंदी को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के कार्यालय के सक्रिय होने के बाद उम्मीद बंधी थी कि राजस्थान सरकार इस संबंध में जल्द ही कोई कार्रवाई करेगी। एमएलएम कंपनियों के संबंध में कोई कानून नहीं होने के चलते आरसीएम उपभोक्ता तथा वितरक भी यही मांग करते आ रहे हैं कि केरल की तर्ज पर राजस्थान में भी गाइडलाइन तय कर दी जाए ताकि कंपनी का काम फिर से शुरू हो। इस संबंध में सरकार के स्तर पर यह आश्वासन दिया गया था कि 15 जुलाई तक कोई न कोई निर्णय इस बारे में कर लिया जाएगा लेकिन ऐसा किया नहीं गया है। इस संबंध में आरसीएम प्रभावितों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्य सचिव से भी मिला था।
आरसीएम की तालाबंदी को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी के कार्यालय के सक्रिय होने के बाद उम्मीद बंधी थी कि राजस्थान सरकार इस संबंध में जल्द ही कोई कार्रवाई करेगी। एमएलएम कंपनियों के संबंध में कोई कानून नहीं होने के चलते आरसीएम उपभोक्ता तथा वितरक भी यही मांग करते आ रहे हैं कि केरल की तर्ज पर राजस्थान में भी गाइडलाइन तय कर दी जाए ताकि कंपनी का काम फिर से शुरू हो। इस संबंध में सरकार के स्तर पर यह आश्वासन दिया गया था कि 15 जुलाई तक कोई न कोई निर्णय इस बारे में कर लिया जाएगा लेकिन ऐसा किया नहीं गया है। इस संबंध में आरसीएम प्रभावितों का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्य सचिव से भी मिला था।



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