एक करोड़ तैंतीस लाख को बेरोजगार कर दिया
Courtesy: Badhata Rajasthan – 13 May 2012
आरसीएम पर कार्रवाई से सड़क पर कर्मचारी
-आरसीएम साबित नहीं हुई चिटफंड कम्पनी
यपुर 13 मई। देश की बड़ी मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों में से एक भीलवाड़ा की आर सी एम पर राज्य सरकार के बेजा शिंकजे से देश भर में कम्पनी का फैला नेटवर्क ना केवल तहस नहस हो गया अपितु इससे जुड़े 10 लाख लोगों के सामने विगत पाँच माह से रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है वहीं दूसरी ओर सरकार पुलिस की गलत कार्यवाही को ठीक करने के मूड में ही नहीं दिख रही।
संवाददाता सम्मेलन में आरसीएम ग्राहक एवम् वितरण कल्याण समिति के प्रवक्ता सर्वश्री कदम सिंह, अवधेश कुमार, मुकेश कोठारी व गोपाल कोशिक ने बताया कि राज्य पुलिस ने राजधानी जयपुर सहित अन्य शहरों में मल्टी लेबल मार्केटिंग के नाम पर सोना बुकिंग का गौरख धंधा कर रही कम्पनियों के घोटाले के बाद अपनी खाल बचाने के लिए भीलवाड़ा की आरसीएम कम्पनी को अपने शिकंजे में लिया और किसी शिकायत के बिना ही उसका कामकाज रूकवा दिया। समिति के प्रवक्ताओं ने बताया कि प्रति माह करोंड़ों का लेन देन कर रही इस कम्पनी पर पुलिस ने चिट् फण्ड एक्ट 1978 के तहत कार्रवाई करना बताया लेकिन इसी एक्ट के नियम उपनियमों में स्पष्ट है कि कोई भी उत्पादन कर अपना माल बेचने वाली, सामाजिक स्तर पर आमजन से जुड़ी, अपना व्यापक कार्यक्षेत्र बना काम करने वाली कम्पनियां इसके दायरे में नहीं आती, इसके बावजूद कुछ नेता व पुलिस अधिकारियों को घोटाले बाज कम्पनियों के कार्यकर्ताओं से लिप्तता के आरोपों से बचाने के लिए आरसीएम को मोहरा बना उस पर गाज गिराई गई।
समिति के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों के लिए गाइड लाइन बना, केरला सरकार ने आर सी एम के कामकाज को साफ सुथरा माना। वहीं दूसरी ओर राज्य की सरकार और पुलिस आर सी एम को बंद कराने, बदनाम कराने तथा इसके नेटवर्क को खत्म करने पर आमादा दिख रही है। समिति प्रवक्ताओं ने इसके लिए राजनैतिक व आर्थिक कारणों से इंकार भी नहीं किया और कहा कि आर सी एम केन्द व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया राजस्व देता था ऐसे में दुधारू गाय का वघ करना एक साजिश ही माना जा सकता है।
समिति प्रवक्ताओं ने कहा कि आर सी एम का पूरा नेटवर्क कम्पनी के सर्वर से संचालित था तथा बिना बिल कम्पनी एक रूपया का लेन-देन भी नही करती थी इस सरवर को डाउन करके पुलिस ने पूरा कारोबार चौपट कर दिया है। कम्पनी के गोदामों, दुकानों में करोड़ों का माल पड़ा खराब हो रहा है, बैंक खातों पर रोक ने लाखों लोगों का पैसा रोक दिया है, जबकी राज्य में अपना उत्पाद बेच रही कतिपय विदेशी कम्पनियां धड़ल्ले से अपना कारोबार कर रही है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कम्पनी के 700 उत्पाद थे जिनकी बिक्री के लिए देश भर में 4500 सेन्टर थे तथा कम्पनी के सवा करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता थे। उन्होंने बताया कि कम्पनी की फैक्ट्रियों, कार्यालयों व सेल डीपों में 10 हजार से ज्यादा का स्टॉफ है जिनके वेतन का 5 माह से कोई पता नहीं है।
समिति प्रवक्ताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री से लेकर 250 जिला कलेक्टर, तीन दर्जन सासंद व अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां मान चुकी है कि आर सी एम ना तो चिट् फण्ड कम्पनी है और ना वह आमजन से ठगी का काम कर रही थी। लेकिन इसके बावजूद राज्य की सरकार, प्रशासन और पुलिस आर सी एम को बर्बाद करने पर तुली है चाहे उसके गलत रवैये, सोच और करतूत से लाखों परिवार भूखमरी और बेरोजगारी के कंगार पर पहुंच चुके हंै और आत्महत्या जैसे गलत रास्ते अपनाने को मजबूर हो रहे हैं विगत 5 मई को आर. सी. एम. के वितरक बालाघाट (मध्यप्रदेश) निवासी नवीन साहु ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली डर है की सरकार की इस उदासीनता की वजह से बेरोजगारी की मार झेल रहे है आर.सी.एम. के वितरक हजारों की संख्या में आत्महत्या करने को मजबूर ना हो जायें।
समिति प्रवक्ताओं ने बताया कि 24 मार्च को मुख्यमंत्री से हुई व्यक्तिगत मुलाकत में इस मामले का शीघ्र सकारात्मक समाधान निकालने के आश्वासन और अनशन समाप्त करने की अपील के बाद दिल्ली जंतर-मंतर पर जारी अनशन समाप्त कर दिया गया परंतु बड़े खेद की बात है कि 50 दिन बीतने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। इस कारण विवश होकर हजारों पीडि़त अब 9 मई से चिलचिलाती धूप व बारिश के बीच स्टेच्यू सर्किल स्थित उद्योग मैदान जयपुर में धरने पर बैठे है अगर सरकार का सकारात्मक रूख सामने नहीं आया तो मजबूर होकर कार्यकर्ताओं को आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
Courtesy: Badhata Rajasthan – 13 May 2012
आरसीएम पर कार्रवाई से सड़क पर कर्मचारी
-आरसीएम साबित नहीं हुई चिटफंड कम्पनी
यपुर 13 मई। देश की बड़ी मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों में से एक भीलवाड़ा की आर सी एम पर राज्य सरकार के बेजा शिंकजे से देश भर में कम्पनी का फैला नेटवर्क ना केवल तहस नहस हो गया अपितु इससे जुड़े 10 लाख लोगों के सामने विगत पाँच माह से रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है वहीं दूसरी ओर सरकार पुलिस की गलत कार्यवाही को ठीक करने के मूड में ही नहीं दिख रही।
संवाददाता सम्मेलन में आरसीएम ग्राहक एवम् वितरण कल्याण समिति के प्रवक्ता सर्वश्री कदम सिंह, अवधेश कुमार, मुकेश कोठारी व गोपाल कोशिक ने बताया कि राज्य पुलिस ने राजधानी जयपुर सहित अन्य शहरों में मल्टी लेबल मार्केटिंग के नाम पर सोना बुकिंग का गौरख धंधा कर रही कम्पनियों के घोटाले के बाद अपनी खाल बचाने के लिए भीलवाड़ा की आरसीएम कम्पनी को अपने शिकंजे में लिया और किसी शिकायत के बिना ही उसका कामकाज रूकवा दिया। समिति के प्रवक्ताओं ने बताया कि प्रति माह करोंड़ों का लेन देन कर रही इस कम्पनी पर पुलिस ने चिट् फण्ड एक्ट 1978 के तहत कार्रवाई करना बताया लेकिन इसी एक्ट के नियम उपनियमों में स्पष्ट है कि कोई भी उत्पादन कर अपना माल बेचने वाली, सामाजिक स्तर पर आमजन से जुड़ी, अपना व्यापक कार्यक्षेत्र बना काम करने वाली कम्पनियां इसके दायरे में नहीं आती, इसके बावजूद कुछ नेता व पुलिस अधिकारियों को घोटाले बाज कम्पनियों के कार्यकर्ताओं से लिप्तता के आरोपों से बचाने के लिए आरसीएम को मोहरा बना उस पर गाज गिराई गई।
समिति के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों के लिए गाइड लाइन बना, केरला सरकार ने आर सी एम के कामकाज को साफ सुथरा माना। वहीं दूसरी ओर राज्य की सरकार और पुलिस आर सी एम को बंद कराने, बदनाम कराने तथा इसके नेटवर्क को खत्म करने पर आमादा दिख रही है। समिति प्रवक्ताओं ने इसके लिए राजनैतिक व आर्थिक कारणों से इंकार भी नहीं किया और कहा कि आर सी एम केन्द व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया राजस्व देता था ऐसे में दुधारू गाय का वघ करना एक साजिश ही माना जा सकता है।
समिति प्रवक्ताओं ने कहा कि आर सी एम का पूरा नेटवर्क कम्पनी के सर्वर से संचालित था तथा बिना बिल कम्पनी एक रूपया का लेन-देन भी नही करती थी इस सरवर को डाउन करके पुलिस ने पूरा कारोबार चौपट कर दिया है। कम्पनी के गोदामों, दुकानों में करोड़ों का माल पड़ा खराब हो रहा है, बैंक खातों पर रोक ने लाखों लोगों का पैसा रोक दिया है, जबकी राज्य में अपना उत्पाद बेच रही कतिपय विदेशी कम्पनियां धड़ल्ले से अपना कारोबार कर रही है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कम्पनी के 700 उत्पाद थे जिनकी बिक्री के लिए देश भर में 4500 सेन्टर थे तथा कम्पनी के सवा करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता थे। उन्होंने बताया कि कम्पनी की फैक्ट्रियों, कार्यालयों व सेल डीपों में 10 हजार से ज्यादा का स्टॉफ है जिनके वेतन का 5 माह से कोई पता नहीं है।
समिति प्रवक्ताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री से लेकर 250 जिला कलेक्टर, तीन दर्जन सासंद व अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां मान चुकी है कि आर सी एम ना तो चिट् फण्ड कम्पनी है और ना वह आमजन से ठगी का काम कर रही थी। लेकिन इसके बावजूद राज्य की सरकार, प्रशासन और पुलिस आर सी एम को बर्बाद करने पर तुली है चाहे उसके गलत रवैये, सोच और करतूत से लाखों परिवार भूखमरी और बेरोजगारी के कंगार पर पहुंच चुके हंै और आत्महत्या जैसे गलत रास्ते अपनाने को मजबूर हो रहे हैं विगत 5 मई को आर. सी. एम. के वितरक बालाघाट (मध्यप्रदेश) निवासी नवीन साहु ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली डर है की सरकार की इस उदासीनता की वजह से बेरोजगारी की मार झेल रहे है आर.सी.एम. के वितरक हजारों की संख्या में आत्महत्या करने को मजबूर ना हो जायें।
समिति प्रवक्ताओं ने बताया कि 24 मार्च को मुख्यमंत्री से हुई व्यक्तिगत मुलाकत में इस मामले का शीघ्र सकारात्मक समाधान निकालने के आश्वासन और अनशन समाप्त करने की अपील के बाद दिल्ली जंतर-मंतर पर जारी अनशन समाप्त कर दिया गया परंतु बड़े खेद की बात है कि 50 दिन बीतने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। इस कारण विवश होकर हजारों पीडि़त अब 9 मई से चिलचिलाती धूप व बारिश के बीच स्टेच्यू सर्किल स्थित उद्योग मैदान जयपुर में धरने पर बैठे है अगर सरकार का सकारात्मक रूख सामने नहीं आया तो मजबूर होकर कार्यकर्ताओं को आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
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