जो नौकरी दे न सके, उसे छीनने का हक नहीं -पहलवान
BY BADHATA
– MAY 14, 2012POSTED IN: अपराध, उदयपुर, कोटा, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, राजनीति, राजस्थान, विविध, शेखावाटी, समाजआरसीएम उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को दिया समर्थन
धरने को सांतवां दिन
जयपुर 13 मई। उद्योग मैदान पर चल रहे आरसीएम के धरने को सोमवार को सांतवा दिन पूरा हो गया। सोमवार को विधायक रणवीर पहलवान का समर्थन मिला।
पहलवान ने धरने पर उपस्थित होकर आंदोलनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जो सरकार लोगों को नौकरी नहीं दे सकती, उसे नौकरी छीनने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस कम्पनी के साथ एक करोड़ से अधिक उपभोक्कता जुड़े हों, जिसके वितरण केन्द्र पूरे देश में फैलें हो, तो लाखों परिवार के आजीविका के साधन को सरकार गलत कैसे ठहरा सकती है। पहलवान ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि सालाना सवा सौ करोड़ राजस्व केन्द्र व राज्य सरकार को देने वाली कम्पनी को पुलिसिया कार्रवाई के तहत बंद कर दिया गया।
पहलनवाल ने कहा कि गत पांच माह से बंद आरसीएम कम्पनी के कारण जनता के साथ-साथ सरकार को भी भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थान के राजस्व का नुकसान करने वाला ऐतिहासिक मुख्यमंत्री बताया।
गौरतलब है कि देश की बड़ी मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों में से एक भीलवाड़ा की आर सी एम पर राज्य सरकार के बेजा शिंकजे से देश भर में कम्पनी का फैला नेटवर्क ना केवल तहस नहस हो गया अपितु इससे जुड़े 10 लाख लोगों के सामने विगत पांच माह से रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है वहीं दूसरी ओर सरकार पुलिस की गलत कार्यवाही को ठीक करने के मूड में ही नहीं दिख रही।
राज्य पुलिस ने राजधानी जयपुर सहित अन्य शहरों में मल्टी लेबल मार्केटिंग के नाम पर सोना बुकिंग का गौरख धंधा कर रही कम्पनियों के घोटाले के बाद अपनी खाल बचाने के लिए भीलवाड़ा की आरसीएम कम्पनी को अपने शिकंजे में लिया और किसी शिकायत के बिना ही उसका कामकाज रूकवा दिया। समिति के प्रवक्ताओं ने बताया कि प्रति माह करोंड़ों का लेन देन कर रही इस कम्पनी पर पुलिस ने चिट् फण्ड एक्ट 1978 के तहत कार्रवाई करना बताया लेकिन इसी एक्ट के नियम उपनियमों में स्पष्ट है कि कोई भी उत्पादन कर अपना माल बेचने वाली, सामाजिक स्तर पर आमजन से जुड़ी, अपना व्यापक कार्यक्षेत्र बना काम करने वाली कम्पनियां इसके दायरे में नहीं आती, इसके बावजूद कुछ नेता व पुलिस अधिकारियों को घोटाले बाज कम्पनियों के कार्यकर्ताओं से लिप्तता के आरोपों से बचाने के लिए आरसीएम को मोहरा बना उस पर गाज गिराई गई।
समिति के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों के लिए गाइड लाइन बना, केरला सरकार ने आर सी एम के कामकाज को साफ सुथरा माना। वहीं दूसरी ओर राज्य की सरकार और पुलिस आर सी एम को बंद कराने, बदनाम कराने तथा इसके नेटवर्क को खत्म करने पर आमादा दिख रही है। समिति प्रवक्ताओं ने इसके लिए राजनैतिक व आर्थिक कारणों से इंकार भी नहीं किया और कहा कि आर सी एम केन्द व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया राजस्व देता था ऐसे में दुधारू गाय का वघ करना एक साजिश ही माना जा सकता है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कम्पनी के 700 उत्पाद थे जिनकी बिक्री के लिए देश भर में 4500 सेन्टर थे तथा कम्पनी के सवा करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता थे। उन्होंने बताया कि कम्पनी की फैक्ट्रियों, कार्यालयों व सेल डीपों में 10 हजार से ज्यादा का स्टॉफ है जिनके वेतन का 5 माह से कोई पता नहीं है।
समिति प्रवक्ताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री से लेकर 250 जिला कलेक्टर, तीन दर्जन सासंद व अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां मान चुकी है कि आर सी एम ना तो चिट् फण्ड कम्पनी है और ना वह आमजन से ठगी का काम कर रही थी। लेकिन इसके बावजूद राज्य की सरकार, प्रशासन और पुलिस आर सी एम को बर्बाद करने पर तुली है चाहे उसके गलत रवैये, सोच और करतूत से लाखों परिवार भूखमरी और बेरोजगारी के कंगार पर पहुंच चुके हंै और आत्महत्या जैसे गलत रास्ते अपनाने को मजबूर हो रहे हैं विगत 5 मई को आर. सी. एम. के वितरक बालाघाट (मध्यप्रदेश) निवासी नवीन साहु ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली डर है की सरकार की इस उदासीनता की वजह से बेरोजगारी की मार झेल रहे है आर.सी.एम. के वितरक हजारों की संख्या में आत्महत्या करने को मजबूर ना हो जायें।
धरने को सांतवां दिन
जयपुर 13 मई। उद्योग मैदान पर चल रहे आरसीएम के धरने को सोमवार को सांतवा दिन पूरा हो गया। सोमवार को विधायक रणवीर पहलवान का समर्थन मिला।पहलवान ने धरने पर उपस्थित होकर आंदोलनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जो सरकार लोगों को नौकरी नहीं दे सकती, उसे नौकरी छीनने का हक नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस कम्पनी के साथ एक करोड़ से अधिक उपभोक्कता जुड़े हों, जिसके वितरण केन्द्र पूरे देश में फैलें हो, तो लाखों परिवार के आजीविका के साधन को सरकार गलत कैसे ठहरा सकती है। पहलवान ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि सालाना सवा सौ करोड़ राजस्व केन्द्र व राज्य सरकार को देने वाली कम्पनी को पुलिसिया कार्रवाई के तहत बंद कर दिया गया।
पहलनवाल ने कहा कि गत पांच माह से बंद आरसीएम कम्पनी के कारण जनता के साथ-साथ सरकार को भी भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थान के राजस्व का नुकसान करने वाला ऐतिहासिक मुख्यमंत्री बताया।
गौरतलब है कि देश की बड़ी मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों में से एक भीलवाड़ा की आर सी एम पर राज्य सरकार के बेजा शिंकजे से देश भर में कम्पनी का फैला नेटवर्क ना केवल तहस नहस हो गया अपितु इससे जुड़े 10 लाख लोगों के सामने विगत पांच माह से रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है वहीं दूसरी ओर सरकार पुलिस की गलत कार्यवाही को ठीक करने के मूड में ही नहीं दिख रही।
राज्य पुलिस ने राजधानी जयपुर सहित अन्य शहरों में मल्टी लेबल मार्केटिंग के नाम पर सोना बुकिंग का गौरख धंधा कर रही कम्पनियों के घोटाले के बाद अपनी खाल बचाने के लिए भीलवाड़ा की आरसीएम कम्पनी को अपने शिकंजे में लिया और किसी शिकायत के बिना ही उसका कामकाज रूकवा दिया। समिति के प्रवक्ताओं ने बताया कि प्रति माह करोंड़ों का लेन देन कर रही इस कम्पनी पर पुलिस ने चिट् फण्ड एक्ट 1978 के तहत कार्रवाई करना बताया लेकिन इसी एक्ट के नियम उपनियमों में स्पष्ट है कि कोई भी उत्पादन कर अपना माल बेचने वाली, सामाजिक स्तर पर आमजन से जुड़ी, अपना व्यापक कार्यक्षेत्र बना काम करने वाली कम्पनियां इसके दायरे में नहीं आती, इसके बावजूद कुछ नेता व पुलिस अधिकारियों को घोटाले बाज कम्पनियों के कार्यकर्ताओं से लिप्तता के आरोपों से बचाने के लिए आरसीएम को मोहरा बना उस पर गाज गिराई गई।
समिति के प्रवक्ताओं ने दावा किया कि मल्टी लेवल मार्केटिंग कम्पनियों के लिए गाइड लाइन बना, केरला सरकार ने आर सी एम के कामकाज को साफ सुथरा माना। वहीं दूसरी ओर राज्य की सरकार और पुलिस आर सी एम को बंद कराने, बदनाम कराने तथा इसके नेटवर्क को खत्म करने पर आमादा दिख रही है। समिति प्रवक्ताओं ने इसके लिए राजनैतिक व आर्थिक कारणों से इंकार भी नहीं किया और कहा कि आर सी एम केन्द व राज्य सरकार के विभिन्न विभागों को प्रतिवर्ष करोड़ों रुपया राजस्व देता था ऐसे में दुधारू गाय का वघ करना एक साजिश ही माना जा सकता है।
समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कम्पनी के 700 उत्पाद थे जिनकी बिक्री के लिए देश भर में 4500 सेन्टर थे तथा कम्पनी के सवा करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता थे। उन्होंने बताया कि कम्पनी की फैक्ट्रियों, कार्यालयों व सेल डीपों में 10 हजार से ज्यादा का स्टॉफ है जिनके वेतन का 5 माह से कोई पता नहीं है।
समिति प्रवक्ताओं ने दावा किया कि प्रधानमंत्री कार्यालय के मंत्री से लेकर 250 जिला कलेक्टर, तीन दर्जन सासंद व अन्य महत्वपूर्ण हस्तियां मान चुकी है कि आर सी एम ना तो चिट् फण्ड कम्पनी है और ना वह आमजन से ठगी का काम कर रही थी। लेकिन इसके बावजूद राज्य की सरकार, प्रशासन और पुलिस आर सी एम को बर्बाद करने पर तुली है चाहे उसके गलत रवैये, सोच और करतूत से लाखों परिवार भूखमरी और बेरोजगारी के कंगार पर पहुंच चुके हंै और आत्महत्या जैसे गलत रास्ते अपनाने को मजबूर हो रहे हैं विगत 5 मई को आर. सी. एम. के वितरक बालाघाट (मध्यप्रदेश) निवासी नवीन साहु ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली डर है की सरकार की इस उदासीनता की वजह से बेरोजगारी की मार झेल रहे है आर.सी.एम. के वितरक हजारों की संख्या में आत्महत्या करने को मजबूर ना हो जायें।



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